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स्वातंत्रय प्रेम की अमर ज्योति- महाराणा प्रताप
Written by एम. सी. कटरपंच   
यह राजस्थान है, जहाँ वीरता बोलती है और गौरव गूंजता है। जी हाँ, यह राजस्थान की वीर प्रसुता भूमि है, जहाँ रणबांकरे, कुम्भा की बहादुरी के गीत कहे जा रहे हैं, आजादी के दीवाने जयमल और पत्ता के त्याग और सूरवीरता के प्रसंगों की कहानियां सुनाई जाती हैं। अपनी समस्त देवता तलवारों के घाव खाकर भी न घबराने वाले राणा सांगा का पराक्रम इतिहास का एक अद्वितीय पृष्ठ बन गया हैं तो अपने सम्मान और सतीत्व की रक्षा के लिये अग्नि की प्रज्जवलित ज्वालाओं में कूदकर अपने प्राणों का जौहर कर देने वाली राजपूती वीरांगना महारानी पद्मिनी का बलिदान भारतीय नारियों के लिये चिर प्रेरणा का स्रोत बन गया है। और हाँ, महाराणा प्रताप का नाम तो जैसे राजस्थान का गौरव और उसकी महानता के साथ ही वीरता का पर्याय बन गया है।
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अप्राकृतिक खानपान ही रोगों का मूल कारण
Written by कंचन गुप्ता   
आखिर मनुष्य बीमार क्यों पड़ता है? स्वास्थ्य विज्ञान के आचार्य बरनर मेकपफेडन का कथन है कि स्वस्थ रहने के नियम बहुत थोडे ौर बहुत ही आसान हैं। उनको सीखने के लिए न कोई शास्त्र पढ़ने की जरूरत है और न ही किसी प्रयोगशाला में जाने की।
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